दिवाली हमारे देश का सबसे बड़ा त्यौहार है। दीपावली को दीपों का त्यौहार कहते हैं। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश की पूजा करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर धन और वैभव की देवी माँ लक्ष्मी खुश होती हैं और और आशीर्वाद के रूप में धन वर्षा करती हैं। इस दिन लोग खील और बताशे से पूजा करते हैं और अपने घरों में विशेष प्रकार के पकवान बनाते हैं। भारत के कोने कोने में इस अवसर पर मेलों का आयोजन किया जाता है। दिवाली खुशियां बांटने और उत्साह मनाने का पर्व है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई इस त्यौहार को हर्षोल्लास के साथ मनाता है। यह त्यौहार हमारे देश भारत के अलावा टोबागो, सिंगापुर, सूरीनम, नेपाल, मॉरीशस, गुयाना, त्रिनद और श्री लंका, म्यांमार, मलेशिया और फिजी में भी मनाया जाता है और तो और भारत के अलावा भी कई देशों में इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाता है।
भारतीय पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन प्रदोष काल के अवसर पर दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है। यदि दो दिन तक अमावस्या तिथि प्रदोष काल का स्पर्श न करे तो दूसरे दिन दिवाली मनाई जाती है। जबकि कुछ ज्योतिषों का मानना है कि यदि प्रदोष काल में दो दिन तक अमावस्या तिथि नहीं आती है तो पहले दिन दिवाली मनाई जानी चाहिए। ज्योतिषों का कहना है कि दीवाली के मौके पर महालक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। दिवाली पूजा यदि सही मुहूर्त पर की जाए तो इसकी विशेषता और भी ज्यादा बढ़ जाती है।
| दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त | |
| दिनांक | 14 नवंबर 2020 |
| लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त | 17:30:10 से 19:26:01 तक |
| अवधि | 1 घंटे 55 |
| प्रदोष काल | 17:27:47 से 20:07:03 तक |
| वृषभ काल | 17:30:10 से 19:26:01 तक |
सूचना: यह मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है।
जैसा कि हम सब जानते हैं कि माता लक्ष्मी के पास पैसों का अनगिनत भंडार है। ऐसे में यदि माता किसी से खुश हो गई और उस पर इनकी दया हो गई तो वह व्यक्ति रातों रात मालामाल हो जाता है। ऐसे में दीवाली पर हर कोई माता लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहता है। इसके लिए लोग महीने भर पहले से ही अपने घरों की साफ सफाई करने लगते हैं। साथ ही दिवाली के दिन विशेष प्रकार का आयोजन करते हैं। पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात में महालक्ष्मी स्वयं भूलोक पर आती हैं और हर घर में अपना कदम रखती है। लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ भगवान कुबेर की पूजा करने का भी विधान है। माता लक्ष्मी की पूजा विधि करते समय कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्री राम, भगवान लक्ष्मण और माता सीता चौदह वर्ष का बनवास काटकर घर लौटे थे। इसी खुशी में अयोध्या वासियों ने घी के दीपक जलाकर प्रभु श्रीराम का स्वागत किया था। तभी से आज तक हम सब दिवाली का त्यौहार मनाते हैं। दिवाली पर्व से और भी पौराणिक मान्ताएं जुड़ी हैं। कहा जाता है कि नरकासुर नामक राक्षस अपनी अलौकिक शक्तियों के चलते देवताओं को बहुत परेशान करता था। ऐसे में भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर दिया और इस चतुर्दशी का नाम नरक चतुर्दशी पड़ गया।
दिवाली हिंदू धर्म का सबसे लोकप्रिय और सबसे बड़ा त्यौहार है। ऐसे में इस दिन का ज्योतिष महत्व भी बहुत बड़ा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन ग्रहों की दिशा और नक्षत्र का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दिन सोना खरीदना बहुत शुभ होता है। कहते हैं कि सोना खरीदने से लक्ष्मी घर में प्रवेश करती है। ज्योतिषियों और विख्यात पंडितों का कहना है कि इस दिन मुहूर्त के अनुसार ही पूजा करना सही रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दीपावली के दिन अमावस्या होती है। इसलिए इस दिन सूर्य और चंद्रमा तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में स्थित होते हैं। सूर्य और चंद्रमा की यह स्थिति शुभ और उत्तम फल देने वाली होती है। इन गुणों की वजह से सूर्य और चंद्रमा दोनों का तुला राशि में स्थित होना एक सुखद व शुभ संयोग होता है।
हम उम्मीद करते हैं कि दिवाली से संबंधित हमारा ये लेख आपको पसंद आया होगा। हमारी ओर से आप सभी को दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं !
जैसा कि हम सब जानते हैं कि माता लक्ष्मी के पास पैसों का अनगिनत भंडार है। ऐसे में यदि माता किसी से खुश हो गई और उस पर इनकी दया हो गई तो वह व्यक्ति रातों रात मालामाल हो जाता है। ऐसे में दीवाली पर हर कोई माता लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहता है। इसके लिए लोग महीने भर पहले से ही अपने घरों की साफ सफाई करने लगते हैं। साथ ही दिवाली के दिन विशेष प्रकार का आयोजन करते हैं। पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात में महालक्ष्मी स्वयं भूलोक पर आती हैं और हर घर में अपना कदम रखती है। लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ भगवान कुबेर की पूजा करने का भी विधान है। माता लक्ष्मी की पूजा विधि करते समय कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्री राम, भगवान लक्ष्मण और माता सीता चौदह वर्ष का बनवास काटकर घर लौटे थे। इसी खुशी में अयोध्या वासियों ने घी के दीपक जलाकर प्रभु श्रीराम का स्वागत किया था। तभी से आज तक हम सब दिवाली का त्यौहार मनाते हैं। दिवाली पर्व से और भी पौराणिक मान्ताएं जुड़ी हैं। कहा जाता है कि नरकासुर नामक राक्षस अपनी अलौकिक शक्तियों के चलते देवताओं को बहुत परेशान करता था। ऐसे में भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर दिया और इस चतुर्दशी का नाम नरक चतुर्दशी पड़ गया।
दिवाली हिंदू धर्म का सबसे लोकप्रिय और सबसे बड़ा त्यौहार है। ऐसे में इस दिन का ज्योतिष महत्व भी बहुत बड़ा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन ग्रहों की दिशा और नक्षत्र का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दिन सोना खरीदना बहुत शुभ होता है। कहते हैं कि सोना खरीदने से लक्ष्मी घर में प्रवेश करती है। ज्योतिषियों और विख्यात पंडितों का कहना है कि इस दिन मुहूर्त के अनुसार ही पूजा करना सही रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दीपावली के दिन अमावस्या होती है। इसलिए इस दिन सूर्य और चंद्रमा तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में स्थित होते हैं। सूर्य और चंद्रमा की यह स्थिति शुभ और उत्तम फल देने वाली होती है। इन गुणों की वजह से सूर्य और चंद्रमा दोनों का तुला राशि में स्थित होना एक सुखद व शुभ संयोग होता है।
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पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्री राम, भगवान लक्ष्मण और माता सीता चौदह वर्ष का बनवास काटकर घर लौटे थे। इसी खुशी में अयोध्या वासियों ने घी के दीपक जलाकर प्रभु श्रीराम का स्वागत किया था। तभी से आज तक हम सब दिवाली का त्यौहार मनाते हैं। दिवाली पर्व से और भी पौराणिक मान्ताएं जुड़ी हैं। कहा जाता है कि नरकासुर नामक राक्षस अपनी अलौकिक शक्तियों के चलते देवताओं को बहुत परेशान करता था। ऐसे में भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर दिया और इस चतुर्दशी का नाम नरक चतुर्दशी पड़ गया।
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